Captain Girja Shankar Singh

भारतीय सैन्य सेवा में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाले कैप्टन स्व0 गिरजा शंकर सिह की प्रेरणा एवं श्रीमती शारदा देवी के मृदुल स्नेहाशीष की सतत छाया तथा श्री हरदेव सिह और श्री राजेश सिह (मुन्ना) के सत् प्रयासो से 01.07.2003 को केराकत की धरती को एक विचारप्रतीक्षित स्नातक महाविद्यालय की उपलब्धि हुयी, जिसमें हिन्दी, प्रा0 इतिहास , समाजशास्त्र , अर्थशास्त्र दर्शशास्त्र, एवं शिक्षाशास्त्र सहित सात विषयों को वीर बहादुर सिह पूर्वाच्चल विश्वविद्यालय , जौनपुर द्वारा सम्बद्वता प्राप्त हुयी एवं सौ सस्थागत विद्यार्थियों के साथ 2003-2004 का सत्रारम्भ हुआ ।
अपनी अल्पायु में ही यह सस्था उत्तरोत्तर विकास कर सत्र 2008-2009 में दो सकायें -कला एवं शिक्षा के साथ क्षेत्र व प्रदेश के लगभग पन्द्रह सौ विद्यार्थियो को उच्च शिक्षा प्रदान कर रही है । सत्र 2008-2009 में कला सकाय को तीन अतिरिक्त विषयों - सस्कृत, भूगोल एवं गृह विज्ञान की मान्यता / सम्बद्वता प्राप्त हो जाने से छात्राओं को अब अपने पसन्दीदा विषय गृह विज्ञान के अध्ययन के लिए किसी अन्य सस्था में जाने की आवश्यकता नही पडेगी। साथ-साथ उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त महाविद्यालय इलाहाबाद के अध्ययन के केन्द्र के रूप में महाविद्यालय कार्यरत / सेवारत शिक्षा अनुरगी ब्यक्तियों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में भी सक्षम सिद्व हुआ है।